राही....कुछ खास
राही हूँ निकला हूँ राह की तलाश मेंं
दुआ है रब से मंंज़िल तक मुझे पहुंचा दे।
कुछ है छिपी सलाहियत अंदर जो है आनी बाक़ि
दुआ है रब से वो सलाहियत मुझे अत़ा कर दे।
तारिक़ियों से उजाले की तरफ आना खुशनसीबी हुआ करता है,
क्यों कि इसी सब- ओ - रोज़ का अक्सर लोगों को इंतजार हुआ करता है।
©shahzad
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