यह कैसी राजनीति हैं,
समझ में न आती हैं।
सत्ता के लालच में,
जनता भेंट चढ़ जाती हैं।
सत्ता पाने के खातिर,
झूठे वादे करते हैं।
जैसे ही सत्ता मिलती,
मद में चूर हो जाते हैं।
जनता इनको कुर्सी पर बैठाती,
बाद में जनता ही ठगी जाती हैं।
यह कैसी राजनीति……….….
जनता इनको इसलिए चुनती,
काम करेंगे अच्छा।
जनता इस भ्रम में रहती,
यह नेता है सच्चा।
साल दो साल समझने में कट गए,
फिर लगे समझाने।
अपनी नाकामियों को वह,
षड्यंत्रों से लगे छुपाने।
वह ठीकरा औरों पे फोड़े,
न समझे अपनी जिम्मेदारी। इस राजनीति के चक्रव्यूह में,
फंस गई जनता बेचारी।
जनता इस चक्रव्यू को,
भेद नहीं पाती है।
यह कैसी राजनीति……….….
यह कैसा तंत्र है,
जिसका मंत्र समझ न आता है।
पहले यह रोड बनवाते,
बाद में तोड़ लाइन डलवाते।
इनके अपने विभाग,
आपस में तय न कर पाते हैं।
इनकी गलत नीतियों से,
बेचारी जनता पिस जाती है।
यह कैसी राजनीति……….….
शिक्षा के नाम पर भी,
छोड़ते नहीं जनता को।
नौकरी देने का वादा करते,
नहीं देते जनता को।
अपने दांव पेंच से,
नौकरियों को अटकाती है।
निज स्वार्थ पूर्ति हेतु,
जमीर बेच खाती है।
यह कैसी राजनीति……….….
बड़े-बड़े घोटाले करते,
याद न करते शर्तों को।
जैसे ही सत्ता में आते,
भूल जाते अपनी शर्तों को।
राजनीति अपने ढंग से करते,
जनता की सुनी न जाती हैं।
जिसके कारण सत्ता मिलती,
उसी को समझ न पाती हैं।
जनता की सारी उम्मीदें,
मिट्टी में मिल जाती है।
यह कैसी राजनीति……….….
“ जय हिंद जय भारत ”
written by-
Dinesh Kumar (DEV)
©dkpoet9
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