रात और सितारे

अंधेरी रात में जब सब कुछ सो जाता है,
तभी आसमां में खेल एक नया शुरू होता है।
सितारे टिमटिमाने लगते हैं, मानो किसी ने
रोशनी की माला चुपके से बिखेर दी होती है।

चाँद भी निकलता है, शर्मीला सा,
उसकी मद्धम रोशनी में सब कुछ नया सा लगता है।
रात का सन्नाटा, सितारों की खिलखिलाहट,
मानो एक अनकही कहानी सुनाता है।

कोई कहता है ये सितारे दूर के दीपक होते हैं,
तो कोई उन्हें अपने प्यारों का आसमान समझता है।
रात और सितारे, एक दूजे के बिना अधूरे,
एक साथ मिल जीवन की राहों में उजाला भरते हैं।

हर रात नई कहानियाँ बुनती है,
और सितारे, उन कहानियों के सच्चे साथी।
जब सब कुछ थम जाता है, ये दोनों
हमें सपने दिखाते हैं,