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रात

रात हम सफ़र मेरी
तन्हाइयां ही सहारा है।
बिन बात किए दिन यूहीं गुजार देना,
अब आदत ही बन गया है मेरा।
रात हम सफ़र मेरी,
अपने साथ जगाए रखती है।
आसमान में अनेक तारे,
पर चांद जैसा अकेला मै।
©atulverma