रात की चादर और चमकते सितारे

काली रात के आँचल में,
जगमगाते हैं ये सितारे।
चुपके से सुनाते हैं कहानियाँ,
अनगिनत, अनसुनी, अद्भुत सारे।

वे चलते हैं संग में चाँद के,
एक सुन्दर रात की बारात बन।
जैसे खिले हों फूल, आसमान की बगिया में,
दिखाते हैं सपने, जो हो सकते हैं अपने।

रात का सन्नाटा, सितारों की झिलमिलाहट,
खींच लेती है मन को, दूर, एक अनजाने सपनों की घाटी में।
वहाँ खो जाना, बिना किसी बंधन के,
आज़ादी की यह महसूस होती है, एक सच्चा रात का उपहार।

ऐ रात और तेरे सितारे, तुम बिना,
यह जीवन लगे अधूरा, एक खाली कैनवास सा।
तेरी इस भव्यता में, हर बार,
मिलता है मन को एक सुकून का आभास।