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रोज़ा

मेरे गुस्से का भी दायरा बनाया है उसने
आज पता चल गया
दुनियादारी के अलावा भी ब्रह्मांड बसता है किसी शहर में सुनकर दिल दहल गया
सवाल पूछ लूंगा किसी और दिन मैं उससे
किसी और कि जिंदगी में अलहदा किस्से बहुत हैं
वक्त को बीतने में शायद समय लगे आज
पर सीखने को मन-मस्तिष्क आज एकमत हैं
एकमत हैं ये सहनशक्ति जानने को
एकमत हैं ये अपनी कमजोरी पहचानने को
एकमत हैं ये अच्छाईयों को थोड़ा और करीब से जानने को
एकमत हैं ये सरहदों को लांघने को।
भूखी जिंदगानी शुक्रिया तुम्हारा
कद्र और एहमियत समझाने के लिए
किस चीज़ की ये मत पूछना अब
जवाब आज न दे पाऊंगा।
#Slam from India
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©aaftab786