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रोकने को रुकना पड़ेगा और ठहरने को ठहरना होगा

रोकने को रुकना पड़ेगा और ठहरने को ठहरना होगा
जरूरी नहीं है मैं रुकूं तुम रुको सब को रुकना पड़ेगा
बात उन दिनों की है शुरुआती बीमारी की विश्व बर में
सब तरफ हाहाकार था सोचने का विचार था कैसे रोके
तभी शुरुआत जब हुई राजस्थान में तो सोचने के बाद थी
क्योंकि जिला मध्य था राजस्थान के क्योंकि मेनचेस्टर है
कल्पना से ही थक हार जाता फिर सोचने की क्या बात है
संकल्प लिया रोकने का और लगा दिया महाकर्फ्यू जिले में
दिन बीते रात बीती और बीता समय देखते ही थम गया था
सोचते रहे जो जीत निश्चित होगी मगर विश्वास भी साथ था
गौरव राज्य का विश्वास भी अटूट था संकल्प के साथ जीत
जहां तक बढ़ रही बीमारी वहां रोकने का एक विकल्प यही
कुशल प्रशासन और कुशल नेतृत्व यही है बाबा तेरी शिक्षा
जिसने भी जाना और परखा तेरी शिक्षा को दीक्षा ज्ञान को
यूं तो कई विकल्प रोकने का हौसला ठहरने का जज्बा
सलाम करता जहां देश और विदेश करेगा भी समाज में
बेहतर कल को बनाने के लिए प्रगति पथ पर लाने के लिए तुम्हें रुकना होगा यही प्रकृति का नियम ,संवेदना , संदेश
माना कि सवाल उठते उठाने वाले भी कमजोर दिल के बस
जब बेटी ने दिया जवाब तो देखते रहे प्रशासन, निर्णय मेरा
कई विकल्प होंगे तुम्हारे पास, तुम्हें खोजना होगा अभी
विलंब हुआ तो रुक पाना दूरी और निराशा भी पूरी होगी
जाति,लिंग,वंश,मूल , वेशभूषा को भूलकर मानवता से
नफरतों की आंधियां से अच्छा मानवता की विश्वास होना
समर्पित तू तो यही मैं और मेरी निष्ठा देश और समाज है
सलाम उन वीरों को जो आज भी युद्ध में तैनात है ,सलाम
©lawnishtha