ऋतुओं का आवर्तन

बसंत आया, नई कोपलें, खिले फूल, हरियाली का संग,
कोयल की कूक, बहार का नूर, जीवन में नई उमंग।

ग्रीष्म की तेज़ दोपहर, साथ लाया आमों का मीठा स्वाद,
सूरज की तपिश, आसमान से जैसे बरसात हो आग।

वर्षा ऋतु की पहली बूंद, मिट्टी की सौंधी महक,
हरियाली का आँचल फैला, मन करे बाहर निकलकर तहलक।

शरद की ठंडी सुबह, कोहरे का कवच,
पत्रों पे ओस की बूंदें, जैसे प्रकृति का आभूषण सच।

हेमंत लाया मिठास, गजक, रेवड़ी की सौगात,
नया वर्ष, नई खुशियाँ, ठंडी हवाओं की राहत।

शीत ऋतु की लंबी रातें, अलाव की गर्माहट,
हर दिन कुछ नया सिखाते, जीवन की अनमोल सी सौगात।

ऋतुएं आती जाती, जीवन के इस चक्र में,
प्रकृति के