वसंत आया, खिले फूल बहार में,
चिरायु हो जीवन, प्यार के प्रहार में।
ग्रीष्म तेज, धूप अंगारा,
जीवन तपे, स्वप्न साकारा।
वर्षा लाई, जीवन में तरंग,
मिटती प्यास, धरा की हर उमंग।
शरद की शीतल बेला में,
पाए विश्राम, चंद्रमा की छाया में।
हेमंत रजत ज्योति बिखेरे,
धरा सोने, स्वप्न सवेरे।
शिशिर ठंढ, कोहरे का आलिंगन,
आगोश में समेटे, समय का संगीतन।
चक्र यह अनंत, जीवन एक अनुकरण,
ऋतुएँ बदलें, लेकिन यात्रा अविरतन।