ऋतुओं का चक्र

वसंत आया, फूलों का संगम,
हरीतिमा में लिपटी धरती का पयाम।
नव पल्लवों का मधुर उल्लास,
बिखेर देता है जीवन में नव आस।

ग्रीष्म की तपन, सूरज का अभिमान,
प्रखर उजाले में छुपा जीवन का वितान।
मन में उम्मीदों की सरिता बही,
जीवन के संघर्ष में नई शक्ति जगी।

वर्षा की रिमझिम, संगीत की धुन,
चाँद की छतरी तले, नाचे मोर बेजुबान।
धरती की प्यास बुझी, नदियाँ खुशी से उफनी,
मिट्टी की सोंधी खुशबू, ले आई प्रकृति की सफाई।

शरद का चांदनी का मेल,
किसलय पर ओस की थाप।
खेतों में सोना उगा, धरा ने श्रंगार किया,
ठंडी हवाओं में अतीत के किस्से सुनाया।

हेमंत ऋतु, सोने की चादर ओढ़े भरा,
कोहरे की ओढ़नी में लिपटा सवेरा।