ऋतुओं का चक्रवाल

वसंत की पहली किरण लाती है नव जीवन,
बौराए फूल, खिले कलियाँ, हरित चादर तन।
कोयल की कूक, मिठास भरे मन में प्रेम कहानी,
वसंत, प्रेम की भाषा बोलता, हर एक राही से जानी।

ग्रीष्म आता, धूप तपती, नदियाँ चुपचाप,
आमों में मिठास, बच्चों की हँसी अपरंपार।
गर्मी की दोपहर, लू के थपेड़े, प्रकृति का ताप,
फिर भी ह्रदय में उम्मीद की बाती जलाए रखती आशाएँ आप।

वर्षा आती, नभ की थाली से, मोती बरसाती,
हरित वसुंधरा, खुशबू से भरी, मन भाव विभोर।
कागज की नाव, पानी के गीत, खुशियों की राती,
वर्षा, प्रकृति से प्रेम का संगीत, अधिकार और समोर।

शरद लाता है, ठंडी हवा, चाँदनी का उत्सव,
किसानों की मेहनत रूपी फसल, सोने की लह