वसंत आया, फूलों ने खुशबू से बातें की,
कोयल ने गीत सुनाया, धरती ने ओढ़ी हरियाली की चादर।
गर्मी की धूप ने, आमों को मीठा बनाया,
नदियों ने चाँदी की तरह चमकते पानी से, धरती को सींचा।
मानसून की बारिश, मिट्टी की सौंधी खुशबू लेकर आई,
छतरियों तले, बच्चे पोखरों में कागज़ की नावें चलाई।
शरद ऋतु ने अपनी ठंडी, सुहानी हवा के साथ,
पतझड़ के पत्तों को, सोने की तरह चमकाया।
हेमंत ने, धरती को अपने कोहरे की चादर में लिपटाया,
अलाव के इर्द-गिर्द, गर्म चाय और चर्चाओं का मेला जमाया।
शीत ऋतु ने, ठिठुरती सर्दी में भी उम्मीदों को गरम किया,
रजाइयों में दुबके, हमने नव वर्ष के सपने संजोये।
प्रकृति की यह कहानी, ऋतुओं