वसंत की मिठी धूप में खिलते कुछ सपने,
हरियाली लपेटे, आता बसंत प्यार से।
फूलों की महक में गूंथे जा रहे हैं गीत,
नये पत्तों की सरसराहट में बजते जीवन के संगीत।
ग्रीष्म का ताप जब दस्तक देता,
धरती तपस्या करती, नदियाँ बहती मद्धम।
आमों की मिठास, गर्म हवाओं का लेन-देन,
बालू के महल सा, जीवन संवरता और बिखरता।
वर्षा की पहली बूंदें, धरती की प्यास बुझाती,
हरितिमा फैल जाती, जैसे नवजीवन की शुरुआत।
मेंढकों का गान, पक्षियों की चहक,
खुशियों की छाप लिए, बारिश की यह रात।
शरद की मधुर चांदनी, कोमल बयार,
धरती को चूमती, कहती प्रेम की सरल व्याख्याएँ।
किसलय छोटे हों, या रातें लंबी,
ज़िंदगी और प्रकृति में