ऋतुओं का मेला

वसंत आया, फूलों की बहार लाया,
कोयल की कूक, मन मोह ले जाया।
पत्तियां हरी, खुशियों की सराय,
वसंत ने सबके दिल में उत्साह बिखेरा, हर माय।


गर्मी की तपन से, सूरज ने कब्जा जमाया,
आमों का रस, पीने को मन ललचाया।
बच्चे छुट्टी में, खुशियों की किलकारी,
गर्मी ने आगोश में सबको, खूब धमाचौकड़ी।


मॉनसून की बूँदें, धरती से मिलने चली,
हरियाली की चादर, धरा पे बिछ गई।
गलियों में कागज़ की नाव, फिर तैर गई,
मॉनसून ने यादों के पन्ने, फिर से खोल दिए।


शरद ऋतु की शीतल हवा, मन को सुख देती,
पके फलों की मिठास, सभी को मिल लेती।
दिवाली की रौशनी, चारों ओर फैल गई,
शरद ने अपने उत्सव से, धरती को सजा दिया।


सर्दियो