ऋतुओं का विविध नृत्य

बसंत में खिलते फूल, मन को लगते प्यारे।
धरा ओढ़े हरी चुनर, दिखती वो न्यारी-न्यारी।

ग्रीष्म की तपिश में जब, धरती सेंके अंग।
आमों की मीठी खुशबू से, भर जाए संग-संग।

वर्षा ऋतु में बूँदों का, धरती से मिलन।
पेड़ों की हरियाली में छुपा, इंद्रधनुष का चित्रण।

शरद की चाँदनी रातें, जैसे स्वप्न लोक।
ओस से भीगी सुबह, जैसे कोहरे का शोक।

हेमंत लाए ठंडी बयार, सर्दी का अहसास।
अलाव की गर्माहट में, सबका उल्लास।

शीत ऋतु में गर्म रजाई, नींद में डूबे ख्वाब।
सर्द हवाओं के बीच, मीठी धूप का जवाब।

इन ऋतुओं के विविध नृत्य में, छिपा प्रकृति का अद्भुत राज।
जीवन की इस विविधता में,