बसंत आया, फूलों का मेला,
हरियाली की चादर, मन मोहक सवेरा।
कोयल कूके, बगिया में खुशियाँ लाया,
हर दिल में नई आशा का संचार।
ग्रीष्म का तपता सूरज, गा रहा आग का गान,
बच्चे बर्फ़ की चुस्कियों में, ढूंढते ठंडक की शान।
आमों की मिठास, गर्मी में भी लाती मुस्कान,
पेड़ों की छाया, बन जाती विश्राम स्थान।
मानसून की पहली बूँद, मिट्टी की सोंधी खुशबू से नाता जोड़े,
हर ओर हरियाली, जैसे धरती ने नया श्रृंगार पहना हो।
बच्चों की हंसी, पानी में कागज़ की नावों का चलना,
मानसून, मन को भिगोए, तन को सुकून दे जाए।
पतझड़ लाता है, जीवन के बदलाव की सीख,
पत्तों का गिरना, नई शुरुआतों की प्रीत।
सुनहरी शामें, ठंडी ह