साहिल पे बैठ कर ज़िन्दगी का सफर देखेंगे
कितना भी रोको, ज़िद है कि हम मगर देखेंगे
सालो के बाद किसी से मिलना है क्या करे
नजर ना मिला पाए तो हम इधर उधर देखेंगे
एक एक कदम भी चलना कितना मुश्किल है
रोकती है देखे हमे कब तक यह लहर देखेंगे
यह कैसी बेकरारी है कि क्या कहे और किसे
मिले उनकी खबर तो कल सारी खबर देखेंगे
पास आगाए वो मगर एक दूरी से बनी हुई है
हम ना बढ़ेगे बस अब तो उनका सब्र देखेंगे
सुबह से अब शाम होने कोई आई है शाहिद
कितनी है हमारी उन्हें आज हम फिक्र देखेंगे
©shahidkhan
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