हम थक गए है अब
तुमसे सवाल करके
जवाब में कई अल्फाज झूठ बयां करते है,
हम कल तक तुम्हारे लिए सवाल पूछते थे
आज हमे जवाब मालूम है
तकलीफ कि गुंजाईश नहीं है।
शायद आज हम साथ है क्योकि जज्बातों कि एहमियत है
कल शायद हम होंगे नहीं
क्योकि अल्लाह को भी हमारी फ़िक्र है।
©letssay
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