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शायद मै गलत था

कभी कभी लगता है ये जो प्रेम है,
कहीं ना कहीं सपनों का अगाध सागर है,
कभी तो इन सपनों की उड़ान भरने को दिल करता है
तो कभी इन सपनों के बिखर जाने का डर ,
कभी कुछ नए सपनों को सजाने का मन करता है,
तो कभी कुछ सपनों की वजह से अपनों के खोने का गम।
©shivom