दिखावा करने में माहिर है
दुनिया सब,कोई नहीं है किसीका
अपनी रोटी सेकने का
प्रयत्न होता है,
जहा भी हो अपना
ही स्वार्थ होता है।कोई नहीं है कीसीका
कहा है अपनापन,
सच होती है अब,
थोड़ी सी अनबन।
मुझे डूबने की रहती,
है सब के दिलो में तड़पन।कोई नहीं है कि
©khempoitry
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