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शब्द और परिभाषा अलग है तेरी और मेरी भाषा में अंतर

शब्द और परिभाषा अलग है तेरी और मेरी भाषा में अंतर
शब्द कभी एक नहीं हुए है अर्थ बदल दिए तुमने और मैंने
कभी धर्म के नाम पर तो कभी मजहब के नाम पर होता है
शब्द तेरे अर्थ मेरे सिर्फ भाषा अलग है तेरी और मेरी क्यों
मैंने अपने अर्थ के अनुसार इंसानियत के अनुसार बदले हैं
और तुमने मजहब और धर्म के नाम पर शब्द अर्थ बदले हैं
यहां कोई छोटा और ना ही कोई बड़ा है रक्त के संबंध मैं
यहां प्राणी का अपना अपना शब्द भाषा बोले और जीवन
तुम अगर चाहो तो अपने साथ बदल सकते हो तेरी इच्छा
मगर मैं कैसे बताऊं तुम मेरे शब्दों में कोष नहीं है उसका
कौन कितना विद्वान है कौन कितना मूर्ख शब्द अलग हैं
आर्थिक सामाजिक धार्मिक लोकतांत्रिक और राज शाही
तो क्या मैं तुम्हारे लिए शब्द बदल दूं नहीं बदल सकता मैं
मुझे भी स्वतंत्र जीवन जीने का हक और अधिकार प्रकृति
तुम मुझे बांटना चाहते हो अपने शब्द में मैं नहीं मान्यता
बेहतर होगा कि तुम अपने शब्द अपने पास शब्दकोश रख
©lawnishtha