शहर की रोशनी

चकाचौंध में खोये, शहर की रोशनी,
नीली, पीली, लाल, हर उमंग की बोली।

इमारतों का जंगल, जैसे तारों का बाजार,
खिड़की से झांकते, मानो रात के सारथी।

गलियों की शोर में, एक शांत सा संगीत,
दिल को छू जाए, जैसे मीठी मधुरिमा।

यूँ शहर की रोशनी, बांधे हर खुशी की डोर,
रात की स्याही में, लिखे नई कहानी।