शहर की रोशनी

शहर की बाँहों में रात का जाम,
रोशनी के ताने-बाने से बुनी हुई शाम.
सड़कों पे झिलमिलाते चिराग,
हर कोने में बिखरी है रोशनी की एक राग.

ऊँची इमारतों की चोटी से,
निहारती है रात शहर की रौनक को.

नीली, पीली, हरी, लाल,
रोशनी के ये रंग, बनाते हैं पल सवाल.
किसी के लिए उम्मीद की किरण,
तो किसी के दिल का अंधेरा चीरन.

रात भर जागता है यह शहर,
रोशनी के सागर में, तैरते हैं ख्वाब और सफर.

चाँद की चांदनी में लिपटा,
शहर की रोशनी, रखती है जिंदगी को सजग.

यह रोशनी, यह चमक, यह अंधेरा,
सिखाती है हमें हर दिन, जीने का फेरा.