आसमान में तारों का खेल, शहर ने चुराया उनका मेल,
नीली, पीली, हरी चमक से, रात का चेहरा कर दिया खेल।
अनगिनत दीपों की ये कतार, जैसे नदी में बहती किसी इबारत की धार,
गलियों, चौराहों, ऊंची इमारतों तक, रौशनी का जादू बिखेरा हर बार।
ये रोशनी जो कहती हैं एक कहानी, शहर की रूह से जुड़ी है भले ही अनजानी,
यहाँ हर रोशन सपना, अंधेरी रातों में लेता है जन्म, बनता मन की उड़ानी।
शहर की रोशनी, ये नहीं सिर्फ उजाला, ये है जिंदगियों का मेला,
जगमगाती इन रातों में, ढूंढते हैं लोग अपनी खुशियों का अकेला।