ये शहर की रोशनी, आसमां से भी ज्यादा चमकीली,
चाँद भी इनके आगे, लगता है थोड़ा सा फीका।
लाखों ख्वाब सजाए, हर इमारत की खिड़की से झांकती,
कहीं दूर जलती बत्तियों में, उम्मीदों का पर्व चमकता।
यहाँ हर गली, हर मोड़ पर, कहानियाँ हैं अनकही,
शहर की रोशनी में छिपी, जीवन की सच्ची सिम्फनी।
रात भर जगमगाती ये रोशनी,
सपनों को नयी उड़ान देती, उम्मीदों की बात करती।