चमकती है जैसे कोई जादू,
रात के अंधेरे में बुनती रोशनी की राजदूत।
वो हर गली, हर मोड़ पर जगमगाती,
कहानियाँ अपनी, हर कोने में बिखराती।
खिड़कियों से टकराती, छतों पर नाचती,
चाँद की चांदनी से लुका-छिपी खेलती।
उस रोशनी में छुपे हैं सपने, अनगिनत उम्मीदें,
रात की गोद में सितारों की तरह बिखरी हुई ख्वाहिशें।
शहर की रोशनी मुझसे बोली,
अंधेरों में भी उम्मीद की किरण है यह खोली।
जगमगाते इस शहर में, खो जाने का अलग ही मजा,
रोशनी की इस दुनिया में, हर ख्वाब को नया आगाज़ है बुनने का।