शहर की रोशनी

जहां रात को भी सूरज जैसा उजाला होता है,
वहाँ शहर की रोशनी में कुछ खास अपनापन होता है।

बुझते नहीं ये दीये, ना ही सितारों की कमी पड़ती,
इस नगर की रौशनी, अकेलापन भी संगीत बनाती।

हर चमकती खिड़की, हर जगमगाती गली,
एक-एक कहानी कहती, मन को भाती।

कितना भी थका होई यात्री,
रोशनी उसे घर की ओर लाती।

यहां हर चमक के पीछे,
खुशियों और आशाओं की छाया होती।

शहर की रोशनी, मेरे लिए न केवल प्रकाश,
बल्कि आस, विश्वास, और सपनों की आभा होती।