S

shikan

संगदिल ए इंसान तू नफरत ना किया कर
हटा माथे की शिकन, मुस्करा के जिया कर
माना कि लकीरें खेन्च दी है जालिमों ने पर
किसी देश का, हर शक्स से रिश्ते सिया कर
कांटो में फूल तो देखे है, पथरों में हरियाली
आजाये मुश्किल तो सब्र से काम लिया कर
मांगना है तो कुछ तो उस मालिक से मांग
बाकी तो ज़माने में हर एक को दिया कर
शराबों में गुम हुई जवानियां कितनी शाहिद
तू तो बस बैठ कर दो घुंट पानी ही पिया कर
©shahidkhan