आबादी में कोई खड़ा होना चाहता है
जिंदगी से कोई बड़ा होना चाहता है
किसी को फ्रक पड़ता है अपनी अनदेखी का
तो कोई नफासत दिखा रहा खुद की जवाबदेही का
पता नही कहां खड़े हो तुम
इस भीड़ में मेरे दोस्त
जरा तन्हाई कि रोशनी में अपना चेहरा दिखा दो मुझे
पता तो चले तुम्हारे लिए मेरी दोस्ती क्या अब भी जवां है।
©aaftab786
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