आज जब तुम न थे साथ ! तो शराब ने लिया था थाम मेरा हाथ !
ले गई वो दूर मुझे ! उमड़ आये थे सब जज्बात !!
यूँ उस हसीन की हर एक बात हमे याद आने लगी !
फिर रह रह कर मुझे वो रुलाने लगी !!
शायद सही नहीं थे मेरे हालात !
तभी शराब भी तो हमे रुलाने लगी !
फिर रुका कुछ पल और खुद को सँभाल!
दिल का हर दर्द शब्दों में फिर निकला !
फिर जैसे आँखों से पीड़ सी आंसूं बनकर चली आई
हर कहानी आपबीती थी उसने सुनाई !
वो कहा कहा उसने कैसे तुम इस दिल में समाये
कैसे लाख सपने थे हमने तुमसे जुड़ कर सजाये
कैसे प्यार अपना पहुँचा अपने चरम पर था
फिर कुछ देर फैला जैसे सनाटा था !
फिर ये दोनो नैयन आसुओ का सैलाब ले अये !
सब छूट गया। ...दिल टूट गया
उस आखिरी घूंट के साथ हर वो रिश्ता छूट गया !
©mukhar
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