देखा है मंजर और देखा है समंदर
विश्वास की दीवार और शहर का मंजर
हर तरफ खामोशी है सिर्फ जीवन के
मैं लड़ रहा हूं आने वाले वक्त की उमंग
सिर झुकाकर चुप रहना खामोशी नहीं
खामोशी तो सिर्फ चुप रहना है सिर झुकाना नहीं
तुम बोलते बहुत हो मगर चुप रहना नहीं अधिकारों
अगर तुम चुप रहोगे बोलोगे नहीं तो तुम गुलाम हो
अगर तुम बोलोगे और अधिकार मांगोगे जीतना है
बस यही खामोशी तुम्हारे दर्द की दवा है चुप रहना
सब कुछ सहना मगर हद में रहना खामोशियां
एक बार आवाज बंद कर निकलो तूफान भी थम जाएं
विश्वास करो तुम्हारी जीत होगी यह बात मेरी है
©lawnishtha
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