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"सिर्फ कुछ चाहते"

तेरी जुल्फें रंगु मैं अपने इश्क में, कि चल अब सांसों को भी ठहर जाने देते हैं।
बेपरवाह होकर मै तुझे इतना इश्क़ करू, कि नाम तेरा ले और बदनाम मै हो जाऊ।
कि कोई नाम इश्क़ पुकारे तो याद हमारी आनी चाहिए।
कि बह जाऊ में इश्क़ की हवाओं में तो, दर्मिया तेरी सासों की होनी चाहिए।
कि बन जाऊ नींद गर मैं तो मेरे आंखे खुलने की वजह तुम होनी चाहिए।
©rishab