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समाज क्या कहेगा।

समाज क्या कहेगा।
इन सुनसानी सड़कों पर कदम चलते-चलते रुक जाते हैं,
क्योंकि मैं लड़की हूं ना हर कदम सोच -सोच कर चलने पड़ जाते हैं,
समाज क्या सोचेगा यह सोचकर कदम रुक जाते हैं,
आकाश तो हम भी छूना चाहते हैं पर समाज क्या रहेगा यह सोचकर कदम रुक जाते हैं।

इस गगन को छूना तो हम भी चाहते हैं,
आकाश में परियों की तरह उड़ाना भी चाहते हैं,
फिर समाज को देखकर सहम जाते हैं,
समाज क्या रहेगा यह सोचकर कदम रुक जाते हैं।

समाज के साथ चलना भी चाहते हैं,
समाज की सोच को बदलना भी चाहते हैं,
फिर समाज को देखकर सहम जाते हैं,
समाज क्या कहेगा यह सोचकर कदम रुक जाते हैं।

जब एक दिन ये कदम बिना डर के चल पाएंगे,
हम भी आकाश को छुपाएंगे,
फिर समाज की सोच से बहुत आगे चले जाएंगे,
समाज क्या कहेगा ये सोचकर फिर कदम कभी रुक ना पाएंगे।
💞 'Sona' 💞