समुद्र की गोद में लहरें खेलती हैं,
चांदनी रात में चाँदी की धार बन जाती हैं।
कभी शांत, कभी उग्र, यह निरंतर बहती हैं,
समुद्र का मन है जैसे, लहरें उसकी भाषा रहती हैं।
इनकी उठती गिरती धुनों में जीवन का संगीत है,
हर लहर के पीछे एक नई कहानी की पुनरावृत्ति है।
समंदर की विशालता में लहरों का नाचना,
दिखाता है कैसे प्रकृति का हर कण है सजीवना।
इक दूजे का साथ निभाते, सागर और उसकी लहरें,
जीवन के उतार-चढ़ाव सिखाते, करते नए सफर।