समुद्र की गहराई में, छिपे हैं कई राज,
लहरों की बातें, कहती पुराने पन्नों के साज।
कभी वो शांत, कभी उथल-पुथल,
जैसे जीवन के संग हो कोई रस्तल।
वो लहरें, आती-जाती,
मानो जीवन के संगीत पर नाचती।
समुद्र किनारे बैठ, जब सोचूँ मैं गहराई से,
वो लहरें मुझसे कहती, 'जीवन है नई हर ख्वाईशे।'
तो आओ, संग मेरे, लहरों की बोली सुनें,
और समुद्र के इस गान में, खुद को पुनः पाएं।