समुद्र की बातें, लहरों के गीत

समुद्र की आवाज़, लहरों का संगीत,
जैसे किसी चित्रकार ने बिखेरे हो रंग अनीत।

किनारे पर खड़ी, नज़रें गड़ाए,
मैं सुन रही हूँ, लहरों का इज़हार, बिन कहे।

उनकी उठान, उनकी गिरावट,
समुद्र की बाहों में सिमटती जिंदगानियाँ।

हर लहर आती है, कुछ कह जाती है,
जैसे सदियों की बातों को संजोए, समय से बह जाती है।

किनारों से मिलकर, फिर वापस जाना,
समुद्र का ये खेल, लहरों का ये फसाना।

न थमने वाला सफर, न कोई मंज़िल पाना,
समुद्र और लहरें, एक दूजे का पैगाम सुनाना।