खेलती हुई लहरें अनगिनत,
जैसे कोई बच्चों की हंसी,
अपने आप में खजाना भरपूर।
कभी शांत, कभी उग्र,
समुद्र की छाती पर खेलती,
लहरें जीवन के गीत गाती।
उनमें छुपा है राज़ अनेक,
मिलन की आशा, विदाई का गीत।
वे आती हैं, वे जाती हैं,
किनारे से लिपट, फिर दूर भागती हैं।
समुद्र और लहरें, अनंत कहानी,
एक अद्भुत संसार की वाणी।