नीली अनंतता में मचलती लहरें
उमड़ती, थमती, फिर खो जाती
चंचल पल में उठती ऊंचाइयों पर
फिर मौन होकर किनारे पर गिरती
गहरे नीले पट पर सजी सफेद रेखाएं
जैसे प्रकृति का एक अनकहा गीत
क्षण भर में उग्र, क्षण भर में शांत
समुद्र की हर लहर एक कहानी
नीली अनंतता में मचलती लहरें
उमड़ती, थमती, फिर खो जाती
चंचल पल में उठती ऊंचाइयों पर
फिर मौन होकर किनारे पर गिरती
गहरे नीले पट पर सजी सफेद रेखाएं
जैसे प्रकृति का एक अनकहा गीत
क्षण भर में उग्र, क्षण भर में शांत
समुद्र की हर लहर एक कहानी