समुद्र की गोद में

नीली अनंतता में उमड़ती लहरें,
छू लेती आसमान को अपनी पुकारें

चट्टानों से टकराकर बिखरती हुई,
करती एक अनोखी संगीत की बयार

कभी शांत, कभी उग्र, कभी मादक स्वर में,
नाचती हुई आती हर एक लहर बार-बार

महासागर की गोद में खेलती हुई,
अपनी कहानियां गुनगुनाती निरंतर