नीली अनंतता में उछलती लहरें
कभी मधुर, कभी प्रचंड
चंचल नाचिन सी झूमती
सागर के संगीत में गूंजती
क्षण में मुस्कुराती, क्षण में गरजती
अपनी कहानियाँ बयाँ करती
अनगिनत स्वरों में गाती
धरती और आकाश को मिलाती
नीली अनंतता में उछलती लहरें
कभी मधुर, कभी प्रचंड
चंचल नाचिन सी झूमती
सागर के संगीत में गूंजती
क्षण में मुस्कुराती, क्षण में गरजती
अपनी कहानियाँ बयाँ करती
अनगिनत स्वरों में गाती
धरती और आकाश को मिलाती