समुद्र की गोद में

नीले विशाल अंचल में
लहरें नाचती सरगम

कभी मधुर, कभी प्रचंड
कभी शांत, कभी उग्र

सिंधु की गोद में खेलती
सपनों के जहाज़ डोलती

क्षण में उठती, क्षण में गिरती
अनंत की कहानी गाती