घुमड़ती, उमड़ती, फिर टकराती बेला
समुद्र सीने पर लहरों के निशान,
कभी शांत, कभी उद्दाम, बहती जिंदगानी का स्पंदन।
उन लहरों में छिपे हैं अनसुने रहस्य,
समुद्र की गहराईयों का उनसे अटूट नाता।
सागर का विस्तार, लहरें उसकी आत्मा,
एक दूजे के बिना, दोनों अधूरे, अनाथ सा।
लहरें आती हैं, उनका जाना भी तय है,
मानो जीवन का एक छोटा सा पड़ाव हो।
जीवन के संघर्ष से लेकर प्रेम तक,
समुद्र और लहरों में सब कुछ समाया हो।
इस अनंत समुद्र की गाथा में,
लहरों का खेल एक अमूल्य उपहार है।
जैसे जीवन के हर पल में,
एक नई कहानी का आगाज़ हो।