समुद्र की सीमा

समुद्र ने लहरों से कहा, "तुम बिना रुके क्यों आती हो?",
लहरें हंस के बोली, "हमें भी तो सागर से मिलने की चाहत है।"

हर एक लहर की उठान, प्रेम कहानी की एक आवाज़,
धरती और आकाश के बीच, समुद्र के प्रेम की राज़।

समुद्र बस ठहरा रहा, लहरें उसकी गोदी में खेलती,
यह कुदरती नाटक है, जो किनारे पे हमें बांधे रखती।

बार-बार आना-जाना, जैसे कोई पुराना वादा हो,
समुद्र और लहरों का मिलन, जैसे जीवन का एक सजीव नाद हो।