बसंत आया, फूलों का संगीत,
हर डाली पर खुशियों की प्रीत।
गर्मी ने धूप में बांधा जीवन,
चादर फैलाती, अपना लीवन।
सावन की बूँदें, मोर का नाच,
हरा-भरा धरती का नया वाच।
पतझड़ लाया, पत्तों का गीत,
गिरते, सजते, जीवन के मीत।
शीत लगाती अपना डेरा,
ओस में बदलती हर कली का फेरा।
रंग-बिरंगे ऋतुओं का ये मेला,
धरा पर जैसे खुशियों का खेला।
हर ऋतु में अनूठी बात,
जैसे जीवन के संगीत की सौगात।