जीवन संस्कारों से बनता है
बिगड़ता अहंकार से है।
उठता श्रेष्ठ विचार से है
गिरता निम्न विकार से है ।।
जीवन जीते कर्म से है
जानते उसको मर्म से हैं ।।
जीवन तंत्र शुभ मंत्र है
यंत्र ही उसका साधन है ।।
जीवन धर्म शुभ आचरण ।
अशुभ मन का करें निराकरण ।।
मन मंदिर ईश्वर का धाम ।
जिसमे वास करें श्रीराम ।।
विद्यावान करें गुणगान ।
मिथ्या वान बने शोकवान ।।
व्यभिचारी बने व्यथित।
जब वह बने अति कर्म पतित ।।
साधु वास करे प्रभु धाम
करे जीव को ज्ञान दान ।।
मेरी कलम से 💕✍️💕
अभिलाषा शर्मा 🌼
©abhilashas
A