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संस्कार और संस्कृती

"अतिथि देवो भवः", यह संस्कार हमारी,
संस्कृति जैसे धरोहर से हीं जग में पहचान हमारी।
संस्कार और संस्कृति के संगम से,
हमारे हृदय में हैं आज खुशियाँ सारी!
©skmahto