आज हम पहुंच गए हैं जहां,
क्या सोचा था कि कभी पहुंचेंगे यहां??
पर बात तो वही आ ही गई,
जो मिला वो संजोया नहीं,
जो है उसे पाने की चाह बची नहीं,
जाने कैसे इस भागती सी जिंदगी में,
सब रुक - सा गया है,
हर एक हर्फ अब चुभ - सा रहा है ऐसे,
ये मीठी - मीठी सी बातें
आज जहर उगल रही हो जैसे,
मानो हमारी ही हमें
बहुत बुरी वाली नज़र लग गई हो जैसे
आज हम पहुंच गए हैं जहां,
क्या सोचा था कि कभी पहुंचेंगे यहां??
©nishabd
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