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सोचो ईश्क न होता

सोचो ईश्क न होता
दुनिया कैसे जी पाता
दुनिया है ईश्क के दिवाने
जिसकी है सुन्दर दिल में ठिकाने
सोचो ईश्क न होते
हम सब कितने मजबूर होते
ईश्क न होने की हमें गम होता
ईश्वर इसकी खुबसूरती यदि न समझा होता
सोचो ईश्क न होता
फिर दुनिया प्यारी हमें न लगता
ईश्क है एक खुशबू की झौका
फिर खुशबू बिन हम कैसे जी पाता
सोचो , जरा सोचो तुम
अगर ईश्क न होता
ईश्क के दिवाने ईश्क में
आज इतने प्यारे न होते।
---- संदीप कुमार "संजन"
भगवानपुर,अररिया,बिहार
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