कभी ये राहें कितना कुछ सीखा जाती है ।
हर एक क्षड़ नई यादे दे जाती है ,
एक सफ़र ही तो है जो पुरानी बातों के भूलने का जरिया है ,
तुम भूलते हो या याद करते हो ये तो तुम्हारा नजरियां है ।
अकेलेपन का एहसास नहीं होता है , क्योंकि हरपल एक अनजानी राहों का साथ होता है ।
कुछ राहें एहसास दिलाती है अपनेपन का तो कुछ एक अधूरे सपने का ।
कितना कुछ सीख जाता है राही इन राहों से ,
किताबे तो बस चंद ज्ञान कि एक छोटी सी जरिया है,
आप किताबों से या सफ़र से सीखते है , ये तो बस आपका नज़रिया है।
©darshan_y1
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