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सुबह हुई, सूरज मुस्काया, शहर ने अपना रंग दिखाया। चाय की खुशबू, हल्की ठंडी…

सुबह हुई, सूरज मुस्काया,
शहर ने अपना रंग दिखाया।
चाय की खुशबू, हल्की ठंडी हवा,
हर चेहरा लग रहा था नया-नया।
दोपहर आई, भागम-भाग,
सड़कों पर गाड़ियों का राग।
दुकानों में भीड़ लगी थी,
हर कोई अपनी धुन में रमा था।
शाम ढली, रोशनी छाई,
शहर ने फिर मुस्कान सजाई।
दोस्त मिले, हँसी बिखरी,
थकान भी जैसे दूर भागी।
रात हुई, सन्नाटा आया,
तारों ने आकाश सजाया।
शहर सोया, सपने सजाए,
नए सवेरे की आस लगाए। 🌙